शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

घुंघराला सा एक रिश्ता !!



उस रोज तुम्हारी बातों ने मुझे और उलझा कर रख दिया,
पहले ही क्या कम उलझन थी, अपने रिश्ते को ले कर?
हमारा तुम्हार रिश्ता भी कितना उलझा-२ सा है..
बिलकुल तुम्हारे घुंघराले बालों की तरह.
तुम्हारे घुंघराले बाल तुम पर जचते हैं,
और यह घुंघराला सा रिश्ता हम (दोनों) पर..
एक लट सुलझाओ तो दूसरी उलझ पड़ती है..
अपना यह रिश्ता भी तो है कितना अजीब,
कुछ-२ तुम्हारे जैसे,
कुछ-२ मेरे जैसे,
और रिश्तों की भीड़ में सबसे अलग..
एक पागल सा...... अपने आप सा इकलौता .
तुम्हारी उलझी सी उन लटों में हाँथ फिराना 
अच्छा लगता था,
अब इस उलझनों से भरे रिश्ते के परतों में
अपनी उंगलियाँ घुमाता रहता हूँ..
जब कभी तुम्हारे बालों को सीधा करता, और 
कोई बाल टूटता.. तुम्हारी चीख निकल जाती थी..
अब इस रिश्ते को सीधा करने बैठता हूँ, और 
कोई एक बारीक सी डोर टूटती है.. मेरी चीख निकल जाती है..
कल जब तुम्हारी फोटो देखि तो जाना
कि तुमने अपनी उलझी लटों को सीधा कर छोड़ा है,
लगा... तुम बदला ले रही हो..
आखिर मैंने भी तो इस रिश्ते को दिखाने को
सीधा रख छोड़ा है..
वैसे मैं इन दोनों कि फितरत से वाकिफ हूँ.
अपन यह रिश्ता और तुम्हारे बाल..
घुंघराले थे, हैं और रहेंगे..!
सुनो..
तुम पर तुम्हारे घुंघराले बाल,
हम(दोनों) पर यह घुंघराला रिश्ता..
अच्छा लगता है!
इन्हें ऐसे ही रहने दो..!!! 

यकी न हो तो किसी से भी पूछ लो! 

शनिवार, 13 अगस्त 2011

Recession जैसी एक लड़की!




कुछ   रिश्ते  कितने  अजीब  होते  हैं  ना?
हम  जानते  हैं, बुझते हैं, पर उन्हें  समझ  नहीं  पाते!
लड़कों का एक झुण्ड बैठा, रोज तम्हे देखता रहता है,
तुम हंसती हो, मुस्कराहट उनके चेहरे पर आती है.
तुम अपने उलझे बालों को सुलझाती हो और चमक 
उनकी आँखों  में  आती है.
Canteen में बैठे-2 हर  शाम  मैं  
उस झुण्ड  को तुम्हे देखते हुए देखता हूँ!
तुम उन्हें नहीं जानती शायद. . 
या जान कर भी अंजान हो.
तुम्हे याद भी न हो, जब तुम एक रोज उदास, मायूस  से बैठी थी,
और वो झुण्ड?
तुमसे कही ज्यादा उदास, मायूस था!
लेकिन जब उस रोज झुण्ड के सब लोग उदास थे, 
तुम आई, तम्हे उनकी उदासी से सरोकार ही क्या? 
उनकी उदासी तो तुम्हे छू कर भी नहीं गुजारी!
पर!
तुम खुश थी और वो बेमन ही तुम्हारी ख़ुशी में शरीक हो गए !
आखिर क्यों? 
यह कैसा रिश्ता है?
रिश्तों की समझ नहीं है मुझे,
और नाही कभी इस रिश्ते को समझ पाउँगा,
यह रिश्ता भी कुछ विकासशील देशों और अमेरिका के रिश्ते 
जैसे ही कुछ होगा !
Recession अमेरिका में आता है,
और market अपना धराशाही हो जाता है!
उधर कर्जे में  अमेरिका डूबता  है,
और इधर हमारे शेयर. .
आज शाम को तुम्हे हंसते हुए देखा, 
उस झुण्ड के लबों पर हंसी चिटक रही थी. .
तबसे तुम, मुझे 'अमेरिका' सी  लगती हो.
और झुण्ड कुछ विकासशील देश. . .
तुम 'Weapon of mass destruction' सी नज़र आती हो, 
और वो झुण्ड . . .............................. . . . .
इन सब के बीच मैं एक मूकदर्शक सा बैठा रह जाता हूँ!
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